नई दिल्ली। रा (वोट) मांगण त्हाई तो भाजे-भाजे आंढैह सै, पर म्हारे समाणे (इलाका) ने गरकी (बाढ़) से बचाण त्हाई कुछ ना करते। ऐ काकी रोशनी क्यू बड़-बड़ा री सै। आज्या बेटी कौशिल्या, तने दिखता कोन्या कै, पूरा समाणा जेठ के महीने मै भी सामण बणा रैव सै। आज घूमण गई थी पाणी मै रिपट कै पड़गी। काकी तू कह तो सही रही है।


