- डॉ0 संगीता शर्मा अधिकारी
रीएंबर्समेंट
दफ्तर में ये ख़बर आग की तरह फैलने लगी कि कल जो विमल तेज बुखार में तप रहा था आज उसका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया है। अब सबके बीच सुगबुगाहटें बढ़ने लगीं।
दफ्तर में ये ख़बर आग की तरह फैलने लगी कि कल जो विमल तेज बुखार में तप रहा था आज उसका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया है। अब सबके बीच सुगबुगाहटें बढ़ने लगीं।
और लाख कोशिश के बाद भी...प्रतिमा को बचाया नहीं जा सका। प्रतिमा तो पिछले 2 माह से कोमा में है जब से वो बाथरूम में फिसल कर सिर के बल गिर पड़ी थी,
"अरे, अब तो ये लोग भी बड़ी, हाई-फ़ाई सोसाइटिज़ में फ़्लैट लेने लगे हैं l" श्रीमती प ने कहा l
"कौन लोग ?" मैंने पूछा l
टी.वी. पर प्रवासी मजदूरों के पलायन और मारा-मारी का हाल देखकर मैं बार-बार सोचता हूं कि कितने नासमझ और बेवकूफ हैं ये लोग, क्या इन्हें कोरोनावायरस की महामारी का अभी तक पता ही नहीं चला या अपनी जान की बिल्कुल भी चिन्ता नहीं।
गर्मियों का मौसम था| हमेशा की तरह गर्मियों की छुट्टियों में सपरिवार अपने गाँव गए हुए थे| जब वापिस लौटे तो पाया, ड्राइंग-रूम में इधर-उधर कुछ तिनके फैले हुए हैं| अरे! ये तिनके कहाँ से आ गए? किस ने फैलाये होंगे? सब हैरान थे और चारों तरफ अपनी निगाहें दौड़ा रहे थे| आखिर पता चल ही गया|
"मैडम, मुझे भी एनुअल डे के कल्चरल प्रोग्राम में पार्टिसिपेट करना है l प्लीज़, मुझे भी ग्रुप डाँस में ले लीजिये l" 12 वर्ष की सातवी में पढ़ने वाली कुषा ने झिझकते हुए अपनी म्युज़िक टीचर से कहाl
शांत जंगल, ऊची, ऊंची पहाड़ियों और उसी पर संकरी पगडंडी का रास्ता जो देवला की झोपड़ी को जाता है। देवला के साथ उसकी पत्नी और दो बच्चे काली और थावरिया भी रहते हैं।
“अनिल, सुनो ना”
“हाँ, कहो”
“हमें कम से कम अब तो मॉम डैड से मिलने जाना चाहिये | पाँच वर्ष हमारे विवाह को हो गए?|
शायद, अब वे मान जाएँ और हमारे प्रेम को समझ सकें |”
जिम्मेदारियों के पहाड़ ने मनोहर लाल को बीमार कर डाला उनको रात दिन जवान बेटी की शादी और शिक्षित बेटे की नौकरी की चिंता सुकून नहीं लेने दे रही थी।
भिलांचल झाबुआ का छोटा सा कस्बा रामनगर ,जहाँ चार खम्भो पर टिकी बांसों की झोपड़ी में सोमला अपने बुजुर्ग माता पिता के साथ रहता था। सोमला जवान था किंतु निरक्षर जिसे अ अनार का भी याद नहीं।अपनी झोपड़ी के समीप उसका छोटा सा खेत था।
आज अचानक मेरे मित्र का वीडियो कॉल आया और मैं सो कर भी नहीं उठी थी इसलिए मैंने फोन नहीं उठाया। लेकिन जब देखा तो खुद को रोक नहीं पाए और रजाई को पलटकर ब्रश करके तुरंत नीचे हॉल में जाकर उन्हें फोन लगा ही दिया।
घोर कलयुग आ गया है ।एक ही बेटा है और कुछ कमी भी नहीं है,इतनी ज़मीन-जायदाद..... ...?
"राम-राम ऐसा अनर्थ तो न कभी देखा,न सुना।
पहली बार ऐसा अनोखा खेल अपने समाज़ में हो रहा है।
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