नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने वेद को आंतरिक और अध्यात्मिक ज्ञान का मूल बताते हुए कहा है कि बाहरी सुख को ही सबकुछ मान कर अशांति और अस्थिरता को न्यौता देने वाली दुनिया को भारत का ज्ञान ही नई दिशा दे सकता है। अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में श्रीपाद दामोदर सातवलेकर कृत वेदों के हिंदी भाष्य के तृतीय संस्करण का लोकार्पण करते हुए उन्होंने कहा कि वेद और भारत दोनों एक ही हैं।


