- कैलाश मनहर
कैलाश मनहर जी की रचनाएँ
उदासियों पे मुझे आ रहा है प्यार अभी,
ठिठुरती धूप में दिखता है कुछ निखार अभी ||
वो मेरे पास नहीं दूर भी कहाँ है मगर,
इस जगह जिसका मैं करता हूँ इन्तज़ार अभी ||
उदासियों पे मुझे आ रहा है प्यार अभी,
ठिठुरती धूप में दिखता है कुछ निखार अभी ||
वो मेरे पास नहीं दूर भी कहाँ है मगर,
इस जगह जिसका मैं करता हूँ इन्तज़ार अभी ||
हमको सिला वफ़ाओं का अच्छा नहीं मिला
हमने जिसे भी टूट के चाहा, नहीं मिला
ताकतवरों के साथ सभी लोग हो लिए
कमज़ोर आदमी को सहारा नहीं मिला
तअज्जुब क्या है, मेरा घर अगर वीरान रहता है,
यही अंजाम होता है जहाँ ईमान रहता है.
अजब हालत हैं छत एक, आँगन एक, ज़ीना एक,
मगर एक दूसरे से आदमी अनजान रहता है.
जीने के लिए रोटी
हँसने के लिए चाँद
चाहिए
चाँद छोड़ती हूँ
तो रोटी तो मिलती है
फेंकता उद्दंड श्रद्धा को
सटी आँगन से रसोई में
द्वार की साँकल बजाकर दिन
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