नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति लागू होने के बाद राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर उत्साह और असंतोष, दोनों साथ-साथ दिखाई दे रहे हैं। एक ओर इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया वाहनों के शोरूम में ग्राहकों की पूछताछ बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर टैक्सी, टूरिस्ट और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े संगठन नीति को जल्दबाजी में लागू किया गया फैसला बता रहे हैं।
सरकार इसे प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम मान रही है, जबकि कारोबारी चार्जिंग नेटवर्क, लागत और वित्तीय सहायता जैसे मुद्दों पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
भीकाजी कामा प्लेस स्थित एक निजी इलेक्ट्रिक कार शोरूम के संचालक रमेश कहते हैं कि नीति लागू होने के बाद ग्राहकों की रुचि स्पष्ट रूप से बढ़ी है। पहले जहां प्रतिदिन दो से तीन लोग जानकारी लेने आते थे, अब यह संख्या बढ़कर आठ से दस हो गई है। फोन पर पूछताछ भी बढ़ी है। ग्राहक रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में मिलने वाली राहत, चार्जिंग सुविधाओं, बैटरी वारंटी और विभिन्न मॉडलों की जानकारी ले रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में यह बढ़ती दिलचस्पी बिक्री में भी बदल सकती है।
प्रीत विहार स्थित एक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन शोरूम के संचालक अविनाश के अनुसार, पहले प्रतिदिन 10 से 12 लोग शोरूम पहुंचते थे, जबकि अब 18 से 20 ग्राहक जानकारी लेने आ रहे हैं। सबसे अधिक मांग इलेक्ट्रिक स्कूटर की है। ग्राहक एक बार चार्ज करने पर मिलने वाली रेंज, चार्जिंग में लगने वाला समय और बैटरी की उम्र से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं।
हालांकि नई नीति को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में अभी भी कई शंकाएं हैं। पहली बार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोग जानना चाहते हैं कि रास्ते में बैटरी खत्म होने पर क्या व्यवस्था होगी, चार्जिंग स्टेशन कितनी दूरी पर उपलब्ध होंगे और बैटरी बदलने का खर्च कितना आएगा। सफदरजंग एन्क्लेव निवासी अंकित बताते हैं कि वे नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। पहले उनका झुकाव पेट्रोल कार की ओर था, लेकिन अब ईवी विकल्प भी देख रहे हैं। उनका कहना है कि यदि टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में राहत मिलती है तो अच्छी बचत होगी, हालांकि अंतिम फैसला चार्जिंग सुविधा और बैटरी लागत की जानकारी मिलने के बाद ही करेंगे।
अर्जुन नगर निवासी जया का कहना है कि वह रोजाना कार्यालय आने-जाने के लिए स्कूटर का उपयोग करती हैं। यदि सरकार सब्सिडी देती है तो इलेक्ट्रिक स्कूटर बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं सादिक नगर निवासी गोलू का कहना है कि पेट्रोल और इलेक्ट्रिक बाइक की कीमत लगभग समान है, लेकिन चार्जिंग की चिंता अभी भी बड़ी बाधा है। उनका मानना है कि पेट्रोल पंपों की तरह व्यापक चार्जिंग नेटवर्क बनने के बाद ही ईवी अपनाना आसान होगा।
ईवी नीति के खिलाफ ट्रांसपोर्टेशन एसोसिएशन
दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट का कहना है कि पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन और आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किए बिना नीति लागू कर दी गई है। उनके अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक वाहनों की तुलना में महंगे हैं और छोटे ऑपरेटरों के लिए तत्काल वाहन बदलना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से चरणबद्ध क्रियान्वयन और आर्थिक सहायता की मांग की।
दिल्ली टूरिस्ट एंड बस एसोसिएशन के प्रतिनिधि बलविंदर सिंह ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों ने नीति का मसौदा तैयार होने के दौरान अपने सुझाव और आपत्तियां सरकार के सामने रखी थीं, लेकिन उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों की कीमत सामान्य बसों से कई गुना अधिक है, रखरखाव महंगा है और रीसेल वैल्यू भी कम है।
टैक्सी कारोबारी परमजीत ने कहा कि हाल के वर्षों में हजारों संचालकों ने सीएनजी और अन्य वाहनों में भारी निवेश किया है। ऐसे में अचानक नई व्यवस्था लागू होने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।


