नई दिल्ली। दिल्ली की सड़कों पर पहले अदृश्य सिरफिरे जिस बीएटी-बीएमएस एप से सरेराह ई-रिक्शा की बैटरी लॉक कर रहे थे, अब उसी एप को सीखकर ई-रिक्शा चालक खुद ही अपने वाहन को अनलॉक कर रहे हैं। कई चालकों ने अपने मोबाइल फोन में एप भी डाउनलोड किया है।
इसमें चालक भी एक-दूसरे की मदद कर उन्हें वाहन अनलॉक करने की तकनीक के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
उधर, केंद्र सरकार ने इस तरह के एप पर पाबंदी तो लगा दी है, इसके बावजूद शुक्रवार को हजरत निजामुद्दीन, सराय काले खां, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर और गीता कॉलोनी समेत अन्य इलाकों में कुछ बुजुर्ग चालक परेशान दिखे। इस एप से अनभिज्ञ कुछ चालक शरारती तत्वों के शिकार हो रहे हैं।
सिरफिरों की शरारत से मारी जाती थी दिहाड़ी
दरअसल, ई-रिक्शा की डिजिटल सुरक्षा के लिए बने इस सिस्टम का कुछ मनचले और शरारती तत्व गलत इस्तेमाल करने लगे। वे राह चलते गरीब चालकों की ई-रिक्शा बैटरियों को ऐप के जरिए रिमोटली लॉक कर देते। इसका सबसे बड़ा खामियाजा 500 रुपये रोजाना किराए पर ई-रिक्शा चलाने वाले गरीब चालकों को भुगतना पड़ता। शुरुआत में जानकारी न होने से चालक बेबस होकर गाड़ी को धक्का लगाते हुए मिस्त्री के पास ले जाते थे। मिस्त्री भी इस मजबूरी का फायदा उठाकर ताला खोलने के नाम पर 200 से 300 रुपये ऐंठ लेते। ऐसे में चालकों की पूरे दिन की गाढ़ी कमाई बर्बाद हो जाती थी और घर का किराया और चूल्हा चलाना तक मुश्किल हो जाता था।
मुसीबत बनने वाला ऐप ही अब बना मददगार
भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद अब चालकों ने इस तकनीकी खेल को समझ लिया है। चालकों के बीच अब बीएटी-बीएमएस ऐप को लेकर जागरूकता काफी बढ़ चुकी है। शुक्रवार को भी जब कुछ मनचलों ने गाड़ियां लॉक कीं, तो चालक पसीने से तर-बतर होकर मिस्त्रियों के पास नहीं भागे। उन्होंने तुरंत जेब से अपना स्मार्टफोन निकाला और इसी ऐप के जरिए अपनी बैटरी को खुद ही अनलॉक कर लिया।


