नई दिल्ली । रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के मद्देनजर रेस कोर्स क्षेत्र के पास स्थित मस्जिद कैंप, भाई राम कैंप और डीआईडी कैंप खाली कराए जाएंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने इन कैंपों में रहने वालों को 15 दिन के अंदर इनको खाली करने का आदेश दिया है।
अदालत ने रेस कोर्स क्षेत्र के पास रणनीतिक महत्व के स्थलों की वजह से इन झुग्गी बस्तियों को हटाने के सरकार के फैसले को जायज ठहराया है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर सरकार का यह निर्णय नीतिगत है, जिसमें न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सावदा-घेवरा स्थित ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में शिफ्ट किए जाने का आदेश दिया।
याचियों की ओर से दलील दी गई थी कि इन्हें कैंपों से हटाए जाने के कारण इनकी आजीविका, इनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने माना कि अनुच्छेद 21 के तहत इन्हें वहां रहने का मौलिक अधिकार है, फिर भी मूल स्थान पर पुनर्वास संभव न होने पर वैकल्पिक स्थान पर उनका पुनर्वास किया जा सकता है। कोर्ट ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) नीति और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पानी, सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
रखरखाव शुल्क जमा करने के लिए तीन माह की छूट
कोर्ट ने लाभार्थी योगदान राशि और रखरखाव शुल्क जमा करने के लिए तीन माह की छूट दिए जाने को भी स्वीकार किया। जिन निवासियों ने अभी आवंटन पत्र नहीं लिया है, उन्हें दस्तावेज सत्यापन के बाद आवंटन पत्र लेकर कब्जा लेने और 15 दिनों में मौजूदा कैंप खाली करने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में सुविधाएं उपलब्ध न कराई गईं तो याचिकाकर्ता नई याचिका दायर कर सकते हैं। इस फैसले के साथ तीनों कैंपों के सैकड़ों परिवारों को सावदा-घेवरा में पुनर्वासित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
मामले में कब क्या-क्या हुआ
इन तीनों कैंपों के निवासियों को पहले बिना वैकल्पिक आवास के हटाने का नोटिस दिया गया था।
बाद में सरकार ने सावदा-घेवरा में फ्लैट आवंटित करने का फैसला लिया।
हाई पावर्ड कमेटी की मंजूरी के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी।


