नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की भारतीय वन सेवा (फोरेस्ट सर्विस) परीक्षा-2022 की आधिकारिक आंसर-की पर उठे सवालों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) को निर्देश दिया है कि वह एक अभ्यर्थी की याचिका पर नए सिरे से विचार करे, जिसमें दावा किया गया है कि परीक्षा के दो प्रश्नों के आधिकारिक उत्तर गलत हैं।
किसी अभ्यर्थी को उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन का पूर्ण अधिकार नहीं
न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओ.पी. शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि कैट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि किसी अभ्यर्थी को उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन का पूर्ण अधिकार नहीं है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में अभ्यर्थी उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन नहीं, बल्कि आधिकारिक आंसर-की में दिए गए उत्तरों की शुद्धता पर सवाल उठा रहा है।
कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आधिकारिक आंसर-की में दिया गया उत्तर स्पष्ट रूप से गलत और अस्वीकार्य है, तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है। वहीं, यदि उत्तर विवादित या संभावित रूप से सही हो, तो न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा।
6 जुलाई को पेश होने के निर्देश
अदालत ने 12 दिसंबर 2025 के कैट के आदेश को रद्द करते हुए मामला दोबारा सुनवाई के लिए अधिकरण को भेज दिया है। साथ ही दोनों पक्षों को 6 जुलाई को कैट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है और मामले का जल्द निपटारा करने को कहा गया है।
याचिकाकर्ता का नहीं हो सका चयन
याचिकाकर्ता ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) वर्ग का अभ्यर्थी है, जिसने यूपीएससी की भारतीय वन सेवा परीक्षा-2022 दी थी, लेकिन वह चयनित नहीं हो सका। इसके बाद उसने कैट में याचिका दायर कर दावा किया कि जनरल स्टडीज पेपर-1 के दो प्रश्नों के आधिकारिक उत्तर गलत हैं, जिससे उसके परिणाम पर असर पड़ा।


