नई दिल्ली। दिल्ली में अब बदमाशों/गैंगस्टर की प्रॉपर्टी केस से अटैच होगी। यह देखा जाएगा कि बदमाशों के पास जो प्रॉपर्टी है वह अपराध की दुनिया से तो नहीं कमाई है। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस में जल्द ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
अब प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होते ही जांच अधिकारी (आईओ) के बैंक खाते में 1500 से 2000 रुपये आ जाएंगे, ताकि आईओ को जांच संबंधी खर्चे उठाने में कोई परेशानी नहीं आए। दिल्ली पुलिस आयुक्त (सीपी) ने बुधवार को दिल्ली के सभी थानाध्यक्षों की बैठक में इस तरह का प्रस्ताव रखे जाने की बातें बताई।
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा ने बुधवार को थानाध्यक्षों की आदर्श ऑडिटोरियम में बैठक बुलाई थी। इसमें गोलचा ने थानाध्यक्षों को कहा कि सभी ठीक से काम करें। उन्होंने बताया कि जो पुलिसकर्मी अच्छा काम कर रहे हैं उनको आउर्ट ऑफ टर्न (ओटीपी) दिया जा रहा है। कई पुलिसकर्मियों को ओटीपी भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव रखा जा रहा है कि प्राथमिकी दर्ज होते ही आईओ के खाते में 1500 से 2000 रुपये आ जाए। ताकि वह जांच के शुरूआती कदम उठा सके। जांच के पूरे खर्चे के पैसे वह बाद में क्लेम कर सकता है।
पुलिस आयुक्त ने थानाध्यक्षों को यह भी बताया कि अब एएसआई (असिस्टेेंट सब-इंस्पेक्टर) की सीधी भर्ती करने के बारे में सोचा जा रहा है, ताकि पुलिसकर्मियों को समय से पदोन्नति मिलती रहे। सीपी ने गत शनिवार को क्राइम रिव्यू मिटिंग में जिला डीसीपी को कहा था कि अब बदमाशों की प्रॉपर्टी को बीएनएसएस की धारा 107 के तहत अटैच करना शुरू करें और इसका ब्योरा कोर्ट में पेश किया जा सके।
यूपी की तर्ज पर बदमाशों की संपत्ति अटैच जरूरी है
सीपी ने थानाध्यक्षों से क्राइम कंट्रोल के लिए उनके विचार रखने को कहा। कई थानाध्यक्षों ने कहा कि बदमाश व अपराध पर अंकुश लगाने के लिए यूपी पुलिस की तर्ज पर चलना जरूरी है। जब तक बदमाशों की प्रॉपर्टी पर प्रहार नहीं होगा, तब तक बदमाशों काबू नहीं आएंगे। बदमाशोंं के घर आदि तुड़वाना जरूरी है।
थानों की इम्प्रेस मनी को मैनेज करने की बात कही थी
हर थाने में एक इम्प्रेस मनी होती है। ये थानों के खर्चे व जांच आदि के लिए होती है। सीपी ने कहा था कि इस इम्प्रेस मनी को कैसे मैनेज किया जाए या फिर कैसे खर्चे किया जाए उस पर बातें कहीं थीं।
निहाल विहार थाने ने पेश की मिशाल
सीपी ने निहाल विहार थाने की तारीफ करते हुए कि अच्छा काम किया है। पॉक्सों के केस में दो महीने में ट्रायल पूरा करवा कर आरोपी को सजा दिलवा दी। हालांकि ट्रायल को लेकर थानाध्यक्षों ने कोर्ट व पीपी को लेकर होने वाली परेशानियों को लेकर भी बात रखी।

