शामली । शामली में प्रेम प्रसंग के चलते बागपत के गांव ककड़ीपुर निवासी राष्ट्रीय स्तर के कबड्डी खिलाड़ी मोनू उर्फ गुल्लू की हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि मोनू की कार्तिक और अन्य आरोपियों ने गोली मारकर हत्या कर दी, मगर करीब सात मिनट तक वह तीनों आरोपियों से उलझता रहा।
पहली गोली अर्जुन ने चलाई मगर वह मिस हो गई। इसके बाद मोनू ने कार्तिक और सत्यम की पिटाई की। सात मिनट तक तीनों के बीच झगड़ा होता रहा। बचने के लिए मोनू खेत के अलावा पटरी और पास में ही नलकूप के पास भी भागते हुए पहुंचा मगर बाद में गिरने पर आरोपियों ने दो गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। कार्तिक के भी चोट के निशान हैं।
देश के लिए कबड्डी खेलना चाहता था मोनू
ककड़ीपुर गांव के राष्ट्रीय स्तरीय कबड्डी खिलाड़ी मोनू उर्फ मोहना का सपना देश के लिए खेलना था, जो उनकी हत्या होने के साथ ही खत्म हो गया। मोनू की हत्या से गांव के लोगों में गम और गुस्सा दोनों दिखाई दिए। ककड़ीपुर गांव निवासी मोनू के पिता सुरेंद्र उर्फ गुन्नू ने बताया कि मोनू आठवीं कक्षा से कबड्डी खेलने लगा था।
उन्होंने बड़ौत अकादमी की ओर से खेलते हुए कई प्रतियोगिताओं में अपनी टीम को जीत दिलाकर ट्रॉफियां जीतीं। मोनू जिले व प्रदेश की कबड्डी टीम में भी खेल था, मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर व मध्य प्रदेश समेत अन्य जगहों पर खेल चुका था। तीन साल पहले बड़ौत के कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पिता सुरेंद्र के साथ खेतीबाड़ी भी संभालनी शुरू कर दी थी।
ऐसी मेहनत करूंगा कि दोगुनी हो जाएगी जमीन
सुरेंद्र ने बताया कि मोनू खुद भी कहता था कि उनके परिवार पर सात बीघा जमीन है, जिसे दोगुनी करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे। एक बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेल लिया तो जमीन दोगुनी हो जाएगी। ये बातें बताते समय सुरेंद्र उर्फ गुन्नू की आंखों में आंसू छलक पड़े। मोनू का बड़े भाई अंकित दिल्ली एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है। मोनू अविवाहित था और उसका भाई भी अविवाहित है।
रोज बाइक से मजदूरों को लाता-ले जाता था मोनू
राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी मोनू उर्फ गुल्लू वर्तमान में खेती से जुड़े कार्यों के जरिए अपने परिवार का सहारा बना हुआ था। उसके पिता ने बताया कि पिछले करीब एक वर्ष से वह खेतों में कीटनाशक दवा के छिड़काव का ठेका ले रहा था। इसके लिए उसे प्रतिदिन शामली के नाला और आसपास के गांवों से मजदूरों को लाना और काम खत्म होने के बाद उन्हें वापस छोड़ना पड़ता था।


