लखनऊ । ब्रिटेन के बुजुर्गों को इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने का झांसा देकर करीब सात करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कसा है। ईडी ने शुक्रवार को आरोपियों की 3.72 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। इसमें कोलकाता स्थित एक भूखंड, फ्लैट, बैंक खातों में जमा रकम और बीमा पॉलिसियां शामिल हैं।
मामले की जांच ईडी का प्रयागराज उप क्षेत्रीय कार्यालय कर रहा है।
फर्जी कॉल सेंटर से करते थे ठगी
ईडी के मुताबिक, गोरखपुर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई। मामले में अनिक दत्ता, आकाश गुप्ता और आदित्य मिश्रा समेत अन्य आरोपी हैं। आरोप है कि गिरोह ने गोरखपुर और रांची में ग्लोबर्ड कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और जुबिलेट इंफो प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से फर्जी कॉल सेंटर चलाए।
आरोपी खुद को ब्रिटिश दूरसंचार कंपनी बीटी ओपनरीच का प्रतिनिधि बताकर ब्रिटेन के बुजुर्गों से संपर्क करते थे। इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने के नाम पर उनसे एनीडेस्क और क्विक असिस्ट जैसे रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराए जाते थे। इसके जरिए आरोपियों को पीड़ितों के उपकरणों और बैंकिंग विवरण तक पहुंच मिल जाती थी।
एक्शन फ्रॉड का अधिकारी बनकर कराते थे रकम ट्रांसफर
ईडी के अनुसार, आरोपियों ने साइबर हमले का डर दिखाकर पीड़ितों को अपने जाल में फंसाया। वे खुद को ब्रिटेन की धोखाधड़ी रिपोर्टिंग सेवा एक्शन फ्रॉड का अधिकारी बताकर पीड़ितों से रकम अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कराते थे। गिरोह के कर्मचारियों को ब्रिटेन के बुजुर्गों से ठगी करने का प्रशिक्षण भी दिया जाता था। ठगी से हासिल रकम को वेस्टर्न यूनियन, मनीग्राम और हवाला के माध्यम से भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड भेजा जाता था। ईडी अब इस मामले में आरोपियों की संपत्तियों और कथित अवैध कमाई से जुड़े लेनदेन की जांच कर रही है।


