नई दिल्ली । राजधानी में नकली, मिलावटी और बिना लाइसेंस के दवाओं की बिक्री के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने पिछली तिमाही में 569 निरीक्षण किए, जिनमें नियमों के उल्लंघन के 272 मामले सामने आए। इनमें 86 मामले नशे की लत डालने वाली और साइकोट्रोपिक दवाओं से संबंधित थे। विभाग ने जांच के लिए 43 नमूने लिए, जिनमें से 26 नकली या मिलावटी पाए गए।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि नकली, मिलावटी और अनधिकृत दवाओं के कारोबार के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए नियमित निरीक्षण, नमूनों की जांच और प्रवर्तन एजेंसियों के साथ संयुक्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि वैध दवाओं की आपूर्ति शृंखला का पता लगाने और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा।
विभाग ने पिछली तिमाही में 433 वैध नमूनों की जांच की। इसके अलावा 3673 सर्वे नमूने और 30 कॉस्मेटिक उत्पादों के नमूने एकत्र किए गए। जांच में 19 कॉस्मेटिक नमूनों में से दो गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। नकली दवाओं के कारोबार के आरोप में छह और बिना लाइसेंस दवाएं या मेडिकल उपकरण बेचने के मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, एनसीबी और दिल्ली पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में एनडीपीएस एक्ट के तहत छह एफआईआर दर्ज हुईं।
कार से बरामद हुए दवाओं के पांच कार्टन
दरियागंज में पदम चंद मार्ग स्थित टी-प्वाॅइंट के पास पुलिस और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने सूचना के आधार पर छापेमारी की। इस दौरान एक व्यक्ति को पकड़ा गया। उसकी कार से बायो-डी3 प्लस, वोवेरान एसआर-100 और अमारिल एमवी 2 एमजी दवाओं के पांच कार्टन बरामद हुए। इनकी कीमत करीब 13.29 लाख रुपये बताई गई है। जांच में वोवेरान एसआर-100 की कुछ स्ट्रिप पर बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और एमआरपी जैसी अनिवार्य जानकारियां भी दर्ज नहीं मिलीं।


