नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बाहरी दिल्ली में एक गोदाम पर छापा मारकर 5,000 से अधिक नकली एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक स्नातक को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के लिए छापी गई इन किताबों को तब जब्त किया गया जब पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में नकली शैक्षणिक सामग्री वितरित करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव के अनुसार आरोपी की पहचान अरविंद कुमार के रूप में हुई है। अपराध शाखा में तैनात इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी, एसआई संदीप संधू व एसआई प्रेमपाल सिंह की टीम ने विशेष सूचना के आधार पर बाहरी दिल्ली के शाहबाद दौलतपुर गांव में स्थित एक गोदाम पर छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक एक टीम दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नकली शैक्षणिक सामग्री छापने और वितरित करने वाले गिरोह की निगरानी कर रही थी। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि 12 मार्च को सूचना मिली कि बाजार में बिक्री के लिए नकली एनसीईआरटी किताबों की बड़ी खेप शाहबाद दौलतपुर स्थित एक गोदाम में रखी गई है। इसके बाद टीम ने गोदाम में तलाशी ली, जहां हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की हजारों एनसीईआरटी की किताबें रखी हुई मिलीं।
उपायुक्त संजीव कुमार यादव के अनुसार किताबों की जांच के लिए एनसीईआरटी के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। जांच के बाद उन्होंने पुष्टि की कि ये किताबें नकली हैं। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर 5,011 नकली किताबों का पूरा स्टॉक जब्त कर लिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश के लिए जांच जारी है।
पुलिस के एक बयान के अनुसार कुमार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और 2003 में दिल्ली आया था। जहां उसके पिता अखबार बेचने का काम करते थे। उसने हंसराज कॉलेज से स्नातक किया और बाद में इग्नू से परास्नातक की पढ़ाई की। प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए सरकारी नौकरी पाने में असफल रहने के बाद उसने कथित रूप से 2022 से नकली एनसीईआरटी किताबें बेचने का काम शुरू किया। पुलिस ने बताया कि कुमार पहले भी दो मामलों में नकली किताबें बेचने के आरोप में गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस अब इस नेटवर्क के किताबों की छपाई, भंडारण और वितरण से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।


